ऐसे वक्त में जब हर कोई परेशान है, हर कोई कोरोना महामारी के मार को झेल रहा है, रोजगार को लेकर संकट के बादल छंटने का नाम नहीं ले रहे हैं, ठीक उसी वक्त इस तरह के स्पेशल ड्राइव से लोगों को उम्मीद दिखने लगी है.
पूर्णिया: बिहार में कोरोना काल में जहां सरकार लोगों को रोजगार देने के लिए लगातार प्रयास कर रही है, वहीं पूर्णिया जिला प्रशासन ने लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए एक अनोखी पहल की है. जिला प्रशासन ने एक ही साथ योजनाओं की एक श्रृंखला के तहत एक साथ चार हजार से अधिक योजनाओं पर काम प्रारंभ किया है.
कोरोना काल में जब रोजगार को लेकर हर कोई परेशान है, उस समय एक विशेष अभियान शुरू कर गांव-गांव में रोजगार सृजन करने से लोगों को एक उम्मीद बंधी है.
बिहार के किसी भी जिले के लिए यह एक अनोखा प्रयोग है, जहां एक ही दिन जिलाधिकारी हों या फिर अन्य अधिकारी सीधे गांव में पहुंचे और योजनाओं की शुरूआत की. इस स्पेशल ड्राइव में पंचायत सरकार भवन के शिलान्यास से लेकर सात निश्चय से संबंधित योजनाओं को हरी झंडी दिखाई गई.
पूर्णिया के जिलाधिकारी राहुल कुमार खुद रूपौली, धमदाहा, भवानीपुर और बनमनखी के ग्रामीण इलाकों का दौरा किया और कई योजनाओं का उद्घाटन किया.
जिलाधिकारी राहुल कुमार आईएएनएस को बताते हैं कि गरीब कल्याण रोजगार अभियान के तहत पूर्णिया के 246 पंचायतों में 4,604 योजनाओं पर काम शुरू किया गया. इसके अलावा जिला के चनका, धुसर टीकापट्टी, कुल्लाखास, बिक्रमपुर और बियारपुर पंचायत में पंचायत सरकार भवन का शिलान्यास किया गया.
उन्होंने प्रत्येक पंचायत भवन के लिए 12,394 श्रम दिवस सृजित किया गया है और इसे छह महीने में तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है. उन्होंने बताया कि सभी योजनाओं के लिए अलग-अलग समयावधि बनाई गई है, जिस के तहत काम प्रारंभ किया गया है.
इस अनोखे ड्राइव में सॉलिड एंड लिक्विड वेस्ट मैनेजमेंट (एसएलडब्लूएम) के तहत भी कई योजनाओं पर काम शुरू किया गया. स्वच्छता को ध्यान में रखते हुए पंचायत स्तर पर घर-घर कूड़ेदान दिए जाने की शुरूआत हुई है. जिले के रूपौली प्रखंड के कोयली सिमड़ा पश्चिम पंचायत से इस योजना की शुरूआत की गई. इस योजना के तहत पंचायत स्तर पर कम से कम 30 लोगों को रोजगार मिलेगा.
प्रधानमंत्री आवास योजना से लेकर मवेशी (पालतू जानवरों) के लिए केटल शेड बनाने की बात हो या फिर आगंनबाड़ी निर्माण का काम, इन सभी योजनाओं की शुरूआत की गई. इन सभी का लक्ष्य ग्रामीण स्तर पर रोजगार का सृजन करना है.
ऐसे वक्त में जब हर कोई परेशान है, हर कोई कोरोना महामारी के मार को झेल रहा है, रोजगार को लेकर संकट के बादल छंटने का नाम नहीं ले रहे हैं, ठीक उसी वक्त इस तरह के स्पेशल ड्राइव से लोगों को उम्मीद दिखने लगी है.

