जिस एप्प के बारे में अमिताभ बच्चन से लेकर प्रधानमंत्री तक ने लोगों को TV और अखबारों ले माध्यम से बताया और उस एप्प को डाउनलोड करने कहा उसके बारे में न तो NIC (National Informatic Centre) को पता है न ही IT मन्त्रालय को। सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी में दोनों विभागों ने यह कहते हुए पल्ला झाड़ लिया कि उन्हें जानकारी नहीं है कि इस एप्प को किसने बनाया। अब राष्ट्रीय सूचना आयोग ने दोनों विभागों को कड़ा पत्र लिखते हुए कहा है कि क्यों न आप पर गोलमोल जवाब देने के कारण जुर्माना लगा दिया जाय।
मामला तब शुरू हुआ जब एक RTI कार्यकर्ता सौरव दास ने NIC से सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मांगी कि आरोग्य सेतु एप्प की डेवलपेमेंट और उसके डेवलपर की जानकारी दी जाय तो NIC ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि यह मामला IT मंत्रालय का है और उसने आवेदन IT मंत्रालय भेज दिया लेकिन वहां से भी टका सा जवाब आया कि उसे इस एप्प के बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है।
केंद्रीय सूचना आयोग ने मंगलवार को NIC से जवाब देने कहा है कि जब आरोग्य सेतु ऐप के वेबसाइट पर उनका नाम है, तो फिर उनके पास ऐप के डेवलपमेंट को लेकर कोई डिटेल क्यों नहीं है? आयोग ने इस संबंध में कई चीफ पब्लिक इन्फॉर्मेशन अधिकारियों सहित नेशनल ई-गवर्नेंस डिवीजन , इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और NIC को कारण बताओ नोटिस भेजा है। सूचना आयोग ने पूछा है कि जिस एप्प को करोड़ो लोगों ने अपने मोबाइल पर डाउनलोड किया है उसकी जानकारी क्यों नहीं दी जा रही है ?
इस मामले में जब सवाल उठाने लगे तब सरकार की ओर से फिर एक गोलमोल जवाब आया कि इस एप्प को सामाजिक सहयोग से तैयार किया गया है और इसपर संदेह नहीं किया जाना चाहिए। हालांकि केंद्र सरकार की ओर से आये जवाब में भी इसके डेवलपर के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है।
शुरू से ही यह एप्प विवादित रहा है। सबसे पहले कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इसपर सवाल उठाए थे लेकिन सरकार की ओर से कोई जवाब नहीं दिया गया था। अब भी इस मामले को टालने के प्रयास ही किया जा रहा है। शुरू में ही कई और लोगों ने इसे डेटा चुराए जाने संबंधी आशंका जाहिर की थी।
सोशल मीडिया में लगातार यह सवाल उठने लगा है कि आखिर आरोग्य सेतु एप्प के बारे में सरकार क्यों कुछ नहीं बताना चाहती है ? इसमें आखिर क्या है जिसे छुपाने की कोशिश की जा रही है। हालांकि इससे पहले सरकार लॉक डाउन के दौरान मजदूरों की जानकारी, कोविड से मरने वाले डॉक्टर्स की मौत की जानकारी भी यह कहकर देने से मना कर चुकी है कि उसके पास कोई डेटा नहीं है।

