नेशनल कॉन्फ़्रेंस के उपाध्यक्ष और जम्मू-कश्मीर राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्लाह ने कहा है कि जब तक जम्मू-कश्मीर को दोबारा राज्य का दर्जा नहीं मिल जाता है, वो विधानसभा का चुनाव नहीं लड़ेंगे.
उमर अब्दुल्लाह ने अंग्रेज़ी के अख़बार इंडियन एक्सप्रेस में सोमवार (27 जुलाई) को एक लेख लिखा है, जिसमें उन्होंने कई अहम बातों का ज़िक्र किया है.
उमर ने लिखा, "जहाँ तक मेरा सवाल है, मैं बिल्कुल स्पष्ट हूँ कि जब तक जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश रहेगा, मैं विधानसभा का चुनाव नहीं लड़ूँगा. इस धरती के सबसे शक्तिशाली विधानसभा का छह सालों तक सदस्य रहने और वो भी उसके नेता रहने के बाद मैं उस सदन का सदस्य नहीं रह सकता जिसके अधिकारों को इस तरह से छीन लिया गया हो."
पिछले साल (2019) पाँच अगस्त को नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने न केवल जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले भारतीय संविधान के अनुच्छेद 370 और 35A को हटा दिया था, बल्कि जम्मू-कश्मीर के राज्य का दर्जा ख़त्म कर उसे दो केंद्र शासित प्रदेशों में बाँट दिया था.
केंद्र सरकार के इस फ़ैसले के कुछ ही घंटे पहले उमर अब्दुल्लाह, उनके पिता और पूर्व मुख्यमंत्री फ़ारूक़ अब्दुल्लाह, राज्य की एक और पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती समेत सैकड़ों नेताओं को नज़रबंद या गिरफ़्तार कर लिया गया था.

