आमतौर पर किसान धान की कटाई के बाद उसकी पराली को जला देते हैं। जिससे काफी मात्रा में धुआं होता है। जो आज के दिनों में दिल्ली में प्रदूषण का मुख्य कारण बन गया है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है जिस पराली को वेस्ट समझ कर जला दिया जाता है, उससे भी कोई बेस्ट चीज बनाई जा सकती है।

दरअसल, यह करामात गोरखपुर की रहने वाली श्रिति पांडे ने कर दिखाया है। श्रिति ने बिहार के पटना में पराली और घास से 50 बेड वाला एक कोविड-19 अस्पताल तैयार किया है। इसकी खासियत यह है कि गर्मी के दिनों में इसके कमरे बेहद ठंडे होते हैं और सर्दी के दिनों में गर्म। जिससे मरीजों को इलाज के दौरान सर्दी और गर्मी से भी राहत मिल रही है।

जहां पूरे देश में खोलना काल में अस्पतालों में बेड की कमी है। ऐसे में मात्र 80 दिनों में श्रिति पांडे ने पराली और धान से 50 बेड का अस्पताल तैयार कर दिया। जहां पर कोरोना मरीजों का इलाज किया जाता है। बता दें कि अब तक इस अस्पताल से 100 से ज्यादा मरीज ठीक हो कर घर जा चुके हैं।


जानिए कौन है श्रिति पांडे

गोरखपुर के रहने वाली श्रिति पांडे ने न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी से कंस्ट्रक्शन मैनेजमेंट में मास्टर की डिग्री हासिल की है। उनकी अपनी खुद की कंस्ट्रक्शन कंपनी भी है। जो देश के कई हिस्सों में काम करती है। श्रिति प्रसिद्ध हैं, तो कम पैसों में टिकाऊ घर बनाने के लिए। अब तक उन्होंने गेहूं के डंठल धान के पुआल से ना जाने कितने घर बनाकर रिकॉर्ड कायम किया है।


श्रिति के बनाए घरों को फोर्ब्स ने भी सराहा है। श्रिति जो इको फ्रेंडली घर बनाती हैं, उससे पर्यावरण का संरक्षण तो होता ही है इसके साथ ही ज्यादा लागत भी नहीं आती। एग्री फाइबर से बनने वाले घर कांक्रीट के मकानों की तरह गर्मी में गर्म नहीं होते साथ ही साथ बिजली की भी बचत होती है। श्रिति के ऐसे प्रयोग की वजह से उन्हें एशिया के 30 मेधावी लोगों में से एक माना जाता है।


इस तरह से बनाए जाते हैं पराली के घर

अस्पताल के भवन को घास और पराली से तैयार किया गया है। इसके लिए घास और पराली में दो-तीन केमिकल डाला जाता है और सभी को मिक्स किया जाता है। इसके बाद मिश्रण को हाई प्रेशर के जरिए दबाकर गर्मी में पकाया जाता है। जिसके बाद भवन निर्माण की सामग्री तैयार हो जाती है और इस तरह से यह सस्ता और टिकाऊ घर इस्तेमाल को तैयार हो जाते हैं।


फिलहाल श्रिति के इस अस्पताल में 24 घंटे डॉक्टरों की तैनाती की गई है। जहां ऑक्सीजन वेंटिलेटर की भी सुविधा रखी गई है। वहां पर करीब 6000 लोगों की टेस्टिंग की जा चुकी है। श्रिति का यह जज्बा उन्हें औरों से अलग बनाता है। उन्होंने अपने राज्य के साथ ही पूरे देश का नाम भी रौशन किया है।