
राजनीति का सिक्का कब किसके हाथों में आ जाए, कुछ कहा नहीं जा सकता | लोकतंत्र की ताकत ही ऐसी है कि हमारे देश में एक चायवाला प्रधानमंत्री बन सकता है | दूधवाला मुख्यमंत्री बन सकता है | वहीं अब कभी हाथ में चाय की प्याली लेकर पंचायत
ऑफिस में आने वाली एक महिला सफाईकर्मी की किस्मत भी बदल चुकी है | अब वे महज सफाईकर्मी नहीं रही, वे अब उसी पंचायत की अध्यक्ष बन चुकी हैं, जो महत्वपूर्ण फाइलों को देखेंगी और बैठकों की अध्यक्षता भी करेंगी।
दरअसल, हालिया निकाय चुनाव में अधिकतर सीटें जीतने वाले माकपा नीत एलडी+ एफ ने पतनापुरम ब्लॉक अध्यक्ष पद के लिए आनंदवल्ली के नाम का प्रस्ताव दिया. माकपा उम्मीदवार आनंदवल्ली ने चुनावों में तलावुर डिवीजन में बड़े अंतर से इस सीट पर जीत हासिल की.2,000 रुपये मासिक वेतन पर करती थीं काम

एक समय था जब आनंदवल्ली ब्लॉक कार्यालय में अधिकारियों के पास चाय पहुंचाने का काम करती थीं | वे बैठकों में सदस्यों द्वारा उठाए जाने वाले मुद्दों को गौर से सुनती थी. जिससे उन्हें इस संबंध में जानकारी भी है. बता दें कि आनंदवल्ली इंटरमीडियट तक पढ़ाई कर चुकी हैं | आनंदवल्ली 2011 में अशंकालिक सफाईकर्मी के तौर पर पंचायत कार्यालय से जुड़ी थीं. वर्ष 2017 तक उन्हें 2,000 रुपये मासिक वेतन मिलता था. बाद में यह राशि बढ़ाकर 6,000 रुपये की गयी थी.
30 दिसंबर को संभाला पदभार

बता दें कि पतनापुरम की 13 सदस्यीय ब्लॉक पंचायत में एलडीएफ ने 13 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि मुख्य विपक्षी कांग्रेस नीत यूडीएफ को छह सीटें मिली. परिषद में एलडीएफ की नेता चुनी जाने के बाद आनंदवल्ली ने 30 दिसंबर को अध्यक्ष का कार्यभार संभाल लिया. अध्यक्ष का पद अनुसूचित जाति या महिलाओं के लिए आरक्षित था. उनकी उपलब्धि पर परिवार, दोस्तों और स्थानीय लोग और गांव वाले बहुत खुश है. आनंदवल्ली के परिवार के कुछ और भी सदस्य माकपा से जुड़े हैं, उनके पति पार्टी की स्थानीय कमेटी के सदस्य हैं.


