घर के करीब पहुंचकर सीमाओं पर हुए क्वारंटाइन पहले लॉकडाउन और उसके बाद जिलों की सीमाओं को सील कर दिए जाने के बाद हजारों लोग अपने घर के करीब पहुंचकर भी परिजनों से नहीं मिल पा रहे हैं। सीमा क्षेत्रों पर ही उन्हें क्वारंटाइन कर दिया गया है। वहां बनाए गए अस्थाई कैंप में उनकी जांच से लेकर खाने-पीने के सारे इंतजाम किए गए हैं। इससे इतर देश के दूसरे प्रदेशों के भी हजारों लोग झारखंड की सीमाओं में फंसे हैं। कुछ चालाकी से पुलिस-प्रशासन की आंखों में धूल झोंककर भागने में भी सफल रहे, जो बड़ी मुसीबत का सबब बन सकते हैं। मंगलवार को भी देश के दूसरे प्रदेशों से लोगों की आवक जारी रही।
पुलिस-प्रशासन की आंखों में धूल झोंककर फरार भी हो रहे लोग
पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश के 61 मजदूरों को सोमवार की रात बड़ाबांबो सीमा पर सरायकेला-खरसावां जिला प्रशासन ने अपने आश्रय में ले लिया है। इसी तरह चेन्नई से 18 और टाटा से घर जा रहे 12 मजदूरों को सोमवार की रात रांची जिले के बुंडू प्रखंड स्थित चेकनाका पर रोक दिया गया। सभी एक कंटेनर और एक मिनी ट्रक में सवार होकर वहां पहुंचे थे। गिरिडीह जिला प्रशासन ने जहां दूसरे राज्यों से आए 172 प्रवासी मजदूरों को जिले के विभिन्न चेकनाकाओं पर क्वारंटाइन पर रखा है, वहीं पाकुड़ जिला प्रशासन ने हिरणपुर में 46 मजदूरों को मॉडल प्लस टू विद्यालय स्थित क्वारंटाइन सेंटर में ठहराया है। इनमें से छह मौका देखकर फरार हो गए।
देवघर में 12 विदेशियों की हुई स्कैनिंग
देवघर के रिखिया आश्रम में रहने वाले 12 विदेशी नागरिकों की स्कैङ्क्षनग की गई। हालांकि किसी भी विदेशी के कोरोना से संक्रमित नहीं पाया गया। सभी को एक दूसरे से दूरी बनाकर रहते हुए होम क्वारंटाइन में रहने का निर्देश दिया गया।
ग्रामीणों ने 24 मजदूरों को पकड़ा
विशाखापट्टनम से काम कर अपने घर उत्तर प्रदेश लौट रहे 24 मजदूरों को सरायकेला खरसावां जिले के चौका थाना क्षेत्र के खूंटी में ग्रामीणों ने पकड़ लिया। ग्रामीणों ने करीब डेढ़ घंटे तक उन्हें कब्जे में रखा। सभी चौका थाना के पास पुलिस चेकिंग से बचने के उद्देश्य से गांव के रास्ते भागने की कोशिश कर रहे थे।

